बेस्ट मेडिकल सॉल्यूशन पत्रिका (ई-पेपर)
June 2016
March 2016
December 2015
March 2015
June 2015
September 2015
September 2016
December 2016

15 साल पहले लग जाएगा दिल की बीमारी का पता

रिसर्च से हृदय रोग से लड़ने की संभावना बढ़ी

Bestmedicalsolutions.com 01/12/2017

शोधकर्ताओं ने खून के जांच की एक नई विधि की खोज की है, जिससे 15 साल पहले ही दिल की बीमारी का पता लगाया जा सकेगा। इडिनबर्ग और ग्लासगो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक खून के जांच की नई विधि 'ट्रापोनिन टेस्ट' है। उन्होंने कहा, खून की जांच कोलेस्ट्राल और रक्तचाप के परीक्षण से ज्यादा कारगर है। जांच का यह नया तरीका डॉक्टरों को समय रहते इलाज करने और लाखों मरीजों को हृदयाघात के चलते मृत्यु से बचाने में कारगर होगा। शोधकर्ताओं ने इस टेस्ट का परीक्षण अभी सिर्फ पुरुष मरीजों पर ही किया है हालांकि ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन ने कहा कि यह महिला मरीजों के लिए भी कारगर है।
प्रोटीन का रिसाव होता है
जब हृदय की मांसपेशियां खराब होना शुरू होती हैं तो उनमें से एक प्रोटीन 'ट्रापोनिन' खून में मिलना शुरू हो जाता है। ट्रापोनिन की बढ़ती मात्रा हृदयाघात के खतरे को 25 फीसदी बढ़ा देती है। खून के जांच से इसका पता लगाया जा सकता है और समय रहते इलाज शुरू हो सकता है। प्रोफेसर निकोलस मिल्स के मुताबिक, जिन लोगों के खून में ट्रापोनिन की मात्रा अधिक होती है उनके मौत का खतरा अधिक होती है।
420 रुपये में परीक्षण
खून की जांच काफी सस्ती है। इसके लिए सिर्फ 420 रुपये (पांच यूरो) ही खर्च करने होंगे और टेस्ट में सिर्फ 30 मिनट का समय लगेगा। शोध से जुड़े प्रोफेसर डेविड न्यूबाई ने कहा, ट्रापोनिन शरीर में एक मापदंड की तरह है इसका बढ़ना दिल के लिए घातक है। डॉक्टर टिम शिको ने कहा, अबतक दिल से जुड़ी बीमारियों का समय से पहले पता लगा पाना काफी मुश्किल था। लेकिन नए परीक्षण से यह संभव है। यह शोध जर्नल आफ द अमेरिकन कालेज आफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।

 

ऐसे करें दौड़ने की शुरुआत

फिटनेस की ओर बढ़ाएं छोटे-छोटे कदम

Bestmedicalsolutions.com 01/12/2017

आप काफी लंबे समय के बाद फिटनेस की चाहत में दौड़ने की शुरुआत करने की योजना बना रहे हैं, तो किसी और से तुलना न करें और छोटे-छोटे कदमों से शुरुआत करें। 
-आप अपने जीवन के किसी मोड़ पर कितने फिट थे यह न सोचें और न ही अपने इर्द-गिर्द मौजूद किसी अन्य व्यक्ति से अपनी तुलना करें। धीमी शुरुआत करें और एक मजबूत आधार बनाएं, ताकि आप चोटिल न हों। 
-शुरुआती कुछ महीनों में गति और दूरी की चिंता न करें। 
-बारी-बारी से एक से पांच मिनट धीमी सैर और एक से पांच मिनट तेज सैर से शुरुआत करें। तीन से छह बार इसे दोहराएं। पहले एक या दो सप्ताह इस पर टिके रहें। 
-एक बार आप पांच से दस मिनट की तेज सैर के अभ्यस्त हो जाएं, उसके बाद आप जॉगिंग की शुरुआत कर सकते हैं। उसके बाद बारी-बारी से एक से पांच मिनट की तेज सैर और एक से पांच मिनट की जॉगिंग करें। इसे तीन से छह बार दोहराएं। 
-अपनी दौड़ को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें। बॉडी वेट्स या मशीनों का प्रयोग करके आप घर या जिम में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग कर सकते हैं। 
-अपने कंधों को रिलेक्स करने और एक ही जगह पर जॉगिंग करने से शुरुआत करें। अपने दोनों हाथों के अंगूठे और तर्जनी उंगली के बीच एक पापड़ रखे होने की कल्पना करें। आपको ये पापड़ तोड़ना नहीं है, इसलिए आपको इसे कोमलता से पकड़ना होगा यानी कि अपने कंधों और शरीर के ऊपरी हिस्से को रिलैक्स रखना होगा। 
-आप चाहे सैर करें या दौड़ें, आपको अपनी सांसों को काबू में करना होगा। जब आप सैर की शुरुआत करें, सांस को काबू में करने का अभ्यास करें। इसके लिए लंबी सांस भरें, एक या दो सेकेंड रोकें और फिर सांस छोड़ें। अभ्यास के बाद यह बेहद सहज हो जाएगा, चाहे आप बेहद तेज गति पर ही क्यों न दौड़ रहे हों। 
-दौड़ते समय केवल आपने कदमों की आवाज सुनें। अगर आप उन्हें सुन पा रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आप बेहद जोर डाल रहे हैं, अपने पैरों का प्रयोग कोमलता से करें। 
-आरंभ में आपका शरीर ही आपको रुकने का संकेत दे देगा, क्योंकि शुरुआत में थोड़ी तकलीफ होगी। पहले तीन से चार सप्ताह ऊपर दी गई सलाह का ही पालन करें, लेकिन अगर कुछ दिन दर्द कायम रहें तो चिकित्सकीय सलाह लें।

-दौड़ की शुरुआत के समय अपनी जरूरत के मुताबिक अच्छे और उपयुक्त जूतों का प्रयोग करें। 
-हर दस से पंद्रह मिनट में एक या दो घूंट पानी पिएं, इससे अधिक नहीं। बेहतर है कि सादे पानी की जगह इलेक्ट्रॉलाइट मिलाकर पानी पिएं। खाने के तत्काल बाद कभी न दौड़ें। जरूरी है कि दौड़ने के बाद, अगले 20 से 30 मिनट के भीतर कुछ प्रोटीन लें।

 

कहीं बिस्तर तो नहीं कर रहा बीमार ?

क्या आपने कभी सोचा है कि आराम पहुंचानेवाला बेड भी आपको बीमार कर सकता है

Bestmedicalsolutions.com 01/12/2017

एक रिसर्च के मुताबिक़, हम अपने जीवन का एक तिहाई हिस्सा बेड पर गुज़ारते हैं. बिस्तर अगर साफ़ न हो, तो आप कई बीमारियों के शिकार हो सकते हैं. कई तरह के एलर्जी, जैसे- गले में खराश, सिरदर्द, अस्थमा अटैक, खुजली, आंखों में जलन आदि लक्षण नज़र आएं, तो सतर्क हो जाइए. हो सकता है, आपका बिस्तर आपके आराम को तकलीफ़देह बना रहा हो.
क्या है बेड पर?
* इंसान के शरीर से एक हफ़्ते में लगभग 14 ग्राम मृत त्वचा निकलती है, जो बिस्तर पर ही रह जाती है.
* इसके अलावा पसीना, धूल के कण, सूक्ष्म जीवाणु जैसे कई तरह के बैक्टीरिया बेड पर होते हैं, जो कई बार नज़र तक नहीं आते.
* ज़्यादातर गद्दे या तकिए पॉलीयुरेथेन फोम से बने होते हैं, जो कि सूक्ष्म जीव, धूल के कण और छोटे-छोटे कीड़ों का पसंदीदा ठिकाना है. आंकड़ों की मानें तो प्रति बिस्तर इनकी संख्या तक़रीबन 10 लाख के क़रीब होती है.
* इस तरह के फोम से टोल्यून डायसिसियनेट्स नाम का रसायन निकलता है, जो सांस के ज़रिए सीधे शरीर के अंदर प्रवेश कर जाता है और फेफड़ों की गंभीर बीमारी का कारण बनता है.
तकिया भी कर रहा है बीमार
* एक रिसर्च के मुताबिक़ रोज़ाना इस्तेमाल किए जानेवाले तकिए का 10 फ़ीसदी वज़न धूल के कण व उस पर मौजूद बैक्टीरिया की वजह से होता है.
* सिर पर लगा तेल भी अक्सर तकिए पर चिपक जाता है, जो कई बार धोने पर भी साफ़ नहीं होता और उसपर भी बैक्टीरिया चिपक जाते हैं.
* बाज़ार में मिलनेवाले फोम से बने तकिए सेहत के लिए ठीक नहीं होते हैं. सोते समय इनसे निकलनेवाले केमिकल एलर्जी और कैंसर जैसी बीमारियों को न्योता देते हैं.
कैसे साफ़ रखें बिस्तर?
* नई चादर या तकिए के कवर को इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह से धो लें और धूप में ठीक से सुखा लें.
* धूल के कण और बैक्टीरिया को अच्छी तरह से साफ़ करने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करें. पानी में कपड़े धोनेवाले कीटाणुनाशक लिक्विड या  एंटीबैक्टीरियल क्लींज़र का इस्तेमाल करें, इससे चादर की बदबू भी निकल जाएगी.
* बेड शीट व तकिए के कवर दूसरे कपड़ों के साथ न धोएं.
* सिंथेटिक फैब्रिक की जगह शुद्ध कॉटन की चादरों व तकिए के कवर का इस्तेमाल करें.
* हर दूसरे दिन बेड शीट और तकिए के कवर बदल दें.
* नर्म तकिए का इस्तेमाल करें, ताकि सोते समय गर्दन व कंधे में अकड़न न आए.
* तकिए को बीच में से मो़डिए, अगर वह अपने पुराने आकार में नहीं आता, तो समझ लीजिए कि इसे बदलने का समय आ गया है.
* खिड़कियां खुली रखें, ताकि धूप कमरे के अंदर आ सके और मॉइश्‍चर व नमी कमरे में न रहे.
* कमरे में मौजूद कारपेट की सफ़ाई रोज़ाना करें. हो सके तो बेडरूम में कारपेट न बिछाएं.
* अगर आपके घर में पेट्स, जैसे- कुत्ता, बिल्ली आदि हों, तो उन्हें बिस्तर या अपने बेडरूम से दूर रखें.
स्वस्थ नींद के लिए इन बातों का ध्यान रखें
* नर्म मैट्रेस, साफ़ चादर और आरामदेह और बैक्टीरिया फ्री तकिया आपको देगा आठ घंटों की स्वस्थ नींद.
* पॉलिस्टर से बनी चादरों को पेट्रोकेमिकल से बनाया जाता है. ये नर्म भले ही हों, लेकिन सेहत के लिए बेहद ही हानिकारक होती हैं.
* अनब्लीच्ड कॉटन की चादरों का इस्तेमाल करें.
* नो आयरन और रिंकल फ्री चादरों का इस्तेमाल बिल्कुल न करें, क्योंकि इन्हें फॉर्मलडीहाइड तरी़के से बनाया जाता है.
गद्दा ख़रीदते समय इन बातों का रखें ख़्याल
* आपकी त्वचा 8 से 10 घंटे तक गद्दे, चादर और तकिए के संपर्क में रहती है. इसलिए इनका चुनाव उतनी ही सावधानी
से करें, जितनी सावधानी से आप अपना आहार चुनते हैं.
* गद्दा ऑरगैनिक हो. दुकानदार से इस बात की पुष्टि कर लें कि मैट्रेस किस फोम से बना है और इसे बनाने में किसी रसायन का इस्तेमाल तो नहीं हुआ है.
* स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर बनाई गई चीज़ें अक्सर महंगी होती हैं. पैसे ख़र्च करने के लिए ज़्यादा मत सोचिए, क्योंकि सवाल आपकी सेहत का है.
* कई तरह के नॉन टाक्सिक व हाइपो एलर्जेनिक मैट्रेस मार्केट में मौजूद हैं. ऐसे गद्दों में बैक्टीरिया नहीं रह पाते हैं.

बेहतर सेहतः खुद के लिए निकालें वक्त

बैलेंस डाइट से मिलेगी अच्छी सेहत और लंबी जिंदगी

Bestmedicalsolutions.com 05/07/2016

दूसरों के लिए सोचना उन्हें वक्त देना बहुत ही पॉजिटिव कदम है, लेकिन कभी-कभी खुद के लिए वक्त निकालना और अपने होने का एहसास करना सुकून देता है। समाज में हम बहुत से लोगों से रिश्ते बनाते हैं। लेकिन जिस तरह हम बाहरी रिश्ते बनाते हैं, हमें स्वयं से भी अपना रिश्ता बनाना चाहिए।

इस बात पर बराबर नजर रखनी चाहिए कि हमारे खुद से रिश्ते कैसे हैं। वर्तमान की भागदौड़ वाली जिंदगी में हम इतने व्यस्त हो चुके हैं कि हमारे पास खुद के लिए समय ही नहीं है। सुबह से लेकर शाम तक हम जो कुछ भी कर रहे हैं, वो ज्यादातर काम सिर्फ दूसरों के लिए ही होते हैं। स्वयं के लिए जीने की समझ,संभावना और गुंजाइश, तीनों ही हमारे भीतर से लगभग गुम होती जा रही है। अगर आप इस व्यस्त जीवन में खुश रहना चाहते हैं तो थोड़ा वक्त खुद के लिए निकालना बेहद जरूरी है। जिन लोगों की आप देखभाल करते हैं उनकी लिस्ट में खुद